Bhatnagar Sabha, Udaipur
     
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History of Bhatnagar Sabha Udaipur
 
 
भटनागर सभा उदयपुर का गौरवशाली इतिहास

स्थापना के वर्ष 1968 से आज तक की अनवरत यात्रा में उदयपुर के कायस्थ समाज में भटनागर सभा एकमात्र ऐसा संगठन है जिसने लोकतान्त्रिक परम्पराओं का निर्वहन करते हुए अतीत से वर्तमान तक की गौरवगाथा का स्वर्णिम इतिहास रचा है और अपनी इस उपलब्धि से हम सभी गौरवान्वित हैं। स्थानीय स्तर पर सभी कायस्थ संगठनों को एक सशक्त मंच के माध्यम से श्री चित्रगुप्त महापरिवार के रूप में संगठित करने को भी हम निरन्तर प्रयासरत है ।

अतीत पर दृष्टिपात करे तो इस संगठन का प्रादुर्भाव 1968 में संभव हुआ जब तत्कालीन समाज सेवकों ने प्रोफेसर श्री उमराव सिंह जी भटनागर के मार्गदर्शन में जबरदस्त जोश और उत्साह से समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य बडी ही मुस्तैदी से प्रारम्भ किया । तत्कालीन समाजसेवी महानुभावों ने अपने श्रेष्ठ अनुभव एवं सहयोग से संगठन की ऐसी नींव रखी कि हम नित नये मुकाम को हासिल करते रहे हैं । वर्ष 1974 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संगठन के संविधान की रचना कर इसे सोसायटी एक्ट के तहत पंजीकृत करवा लिया गया ।

भटनागर सभा के अब तक के सम्पूर्ण सेवाकाल में तत्कालीन सभाध्यक्ष श्री मंगल सिंह जी बक्षी की सोच, कल्पनाशीलता एवं उत्प्रेरणा ने समाज की गतिविधियों को एक नई दिशा प्रदान की । उनके मार्गदर्शन में ही वर्ष 1988 में एक वैचारिक क्रांन्ति का उद्भव हुआ, जिसका परिणाम रहा - भटनागर सभा, उदयपुर के सूचना पत्र का नियमित प्रकाशन । तब से आज तक प्रतिवर्ष गणतन्त्र दिवस, भारतीय नववर्ष, स्वतन्त्रता दिवस एवं दीपावली पर सूचना पत्र का प्रकाशन निर्बाध जारी है और यह सूचना पत्र समाज को एक सूत्र में पिरोने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है ।

इसी क्रम को आगे बढाते हुए संगठन के रजत जयन्ती वर्ष में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. श्री बिजयप्रकाश जी भटनागर ने अपने दीर्घ अनुभवों का समाजहित में सदुपयोग करते हुए समाज के युवा वर्ग से संगठन की शक्ति बनने का आव्हान किया। समाज के युवा साथियों ने भी नये जोश के साथ कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी क्रियाशीलता दिखाई और सामाजिक परिदृश्य में खुशनुमा बदलाव देखने को मिला । इसी दौरान आपने भटनागर दर्पण के माध्यम से भटनागर सभा के रजत जयन्ती वर्ष तक का लेखा- जोखा समाज के समक्ष प्रस्तुत कर समाजजनों में एक विश्वास तथा और भी बेहतर कार्य करने का जज्बा पैदा किया ।

अपनी स्थापना से अब तक की सम्पूर्ण अवधि में यह अतिविशेष उपलब्धि रही कि प्रत्येक नई कार्यकारिणी ने ना सिर्फ पिछले शेष कार्यों को पूर्ण करने में तत्परता दिखाई वरन् नये विचारों एवं नये लक्ष्यों से इस संगठन को सुदृढता भी प्रदान की । समय समय पर भटनागर दर्पण एवं दूरभाष निर्देशिका का प्रकाशन, साथ ही शिक्षा सहायता कोष, विधवा सहायता कोष, स्वास्थ्य सेवा सहायता कोष, मन्दिर सेवा कोष, सामुदायिक केन्द्र विकास कोष आदि की स्थापना एवं इन कोषों में उत्तरोतर वृद्धि के नियमित प्रयास इस बात की गवाही देते हैं कि समाज अपने चिन्तनशील बुजुर्गों व युवा साथियों के दम पर प्रगति के पथ पर सतत प्रयत्नशील एवं अग्रसर है ।